आदिदेव भगवान् गणेश समस्त विघ्नों के हर्ता और सिद्धि-बुद्धि के दाता माने गए हैं। ओंकार को गणपति का प्रतीक और ध्वनि का आरम्भ माना गया है। इसी कारण उपनिषदों में भी इस विषय में अनेक संदर्भ प्राप्त होते हैं। 'श्री गणेश उपासना और साधना' पुस्तक भगवान् गणेश के प्राकट्य की अनेक कथाओं के साथ उपासना भेद समझाने का अनिवार्य मंत्र है। इतना ही नहीं इसमें साधक और उपासक दोनों दृष्टियों से कई उपासक तर्कों का तथ्यात्मक समाधान भी किया गया है।'गणेश उपासना और साधना' सहेजने योग्य ग्रंथ है।