जब भीगी माटी मन की

Bookleaf Publishing
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9789369532858
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ISBN13:
9789369532858
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जिस प्रकार सूखी पड़ी मट्टी में जब बारिश की फुहार पड़ती है तो एक सौंधी-सी ख़ुशबू जन्म लेती है और वह सुगंध हमारे मन को आनंदित कर देती है, भाव विभोर कर देती है, विचार-शून्य कर देती है। ठीक उसी प्रकार जब मानव मन पर विषयों का प्रभाव पड़ता है तो भावनाएं, छंद का दामन थाम कर कविता का रूप धारण करती हैं ।इस काव्य-संग्रह में बचपन से लेकर आज तक कविताओं की मेरी संपूर्ण यात्रा शामिल है। यह कविताएं वास्तव में मात्र शब्द नहीं है बल्कि बाल मन से युवा मन तक का सफ़रनामा है । इस जीवन के रंग बहुत ख़ूबसूरत हैं और ख़ूबसूरत हैं सारे एहसास। उन्हीं कुछ एहसासों को अल्फ़ाज़ों का लिबास पहना कर आपसे मिलवाने लाया हूं। मुझे आशा है कि ये मुलाक़ात आपको रास आएगी।


  • | Author: बिंदुì
  • | Publisher: Bookleaf Publishing
  • | Publication Date: Apr 18, 2025
  • | Number of Pages: 00084 pages
  • | Binding: Paperback or Softback
  • | ISBN-10: 9369532854
  • | ISBN-13: 9789369532858
Author:
Publisher:
Bookleaf Publishing
Publication Date:
Apr 18, 2025
Number of pages:
00084 pages
Binding:
Paperback or Softback
ISBN-10:
9369532854
ISBN-13:
9789369532858