हिन्दू धर्म के लिए प्रकाश स्तंभ रहे हैं भगवान राम। 'धनुर्धारी राम' में उनकी भूमिका को नए अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। राम को पौरुष तथा पुरुषार्थयुक्त सत्पुरुष के रूप में चित्रित किया गया है। राम के प्रभामंडल से आलौकिकता के मुकुट को उतारकर मानवीय उत्कर्ष का उन्हें दृष्टांत बनाया गया है। लेखक ने कई प्रकार के अस्त्रों और शस्त्रों का वर्णन किया है, क्योंकि 'धनुर्धारी' शब्द की व्याख्या करने पर इस शब्द के अर्थ को एक ऐसे योद्धा के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है, जो शत्रु के सम्मुख अपनी शक्तियों को एक सूत्र में पिरोना जानता है और संगठन की शक्ति रखता है। राम ऐसी ही विशेषताओं के स्वामी थे, तभी तो वह 'श्रीराम' कहलाए और जीवन संघर्ष से विजेता बनकर निकलने के बाद 'धनुर्धारी राम'।