Aur In Sab Ke Bich
Prabhakar Prakashan
ISBN13:
9789356825680
$16.53
युवा कवि नेहल शाह की कविताओं में स्त्री-विमर्श एक आंतरिक विद्रोह के संकल्प के साथ मुखरित होता है। यूँ तो विद्रोह आधुनिक परिप्रेक्ष्य में हर स्त्री-विमर्श का सहज बल्कि अनिवार्य अंग है लेकिन नेहल की कोशिश हर स्तर पर उसे अराजक होने से बचाने की होती है। मुखर होने की कोशिश में अराजक होना बहुत संभव है लेकिन ऐसी संभावनाओं का अंत तभी संभव होता है जब आप निषेध का तापमान नियंत्रित रख सकें। अब नेहल यह इसलिए कर पाई कि वह स्त्री देह और मन दोनों की केमिस्ट्री से जूझने की पुरजोर कोशिश करती हैं
- | Author: Nehal Shah
- | Publisher: Prabhakar Prakashan
- | Publication Date: Jan 16, 2025
- | Number of Pages: 00150 pages
- | Binding: Paperback or Softback
- | ISBN-10: 9356825688
- | ISBN-13: 9789356825680
- Author:
- Nehal Shah
- Publisher:
- Prabhakar Prakashan
- Publication Date:
- Jan 16, 2025
- Number of pages:
- 00150 pages
- Binding:
- Paperback or Softback
- ISBN-10:
- 9356825688
- ISBN-13:
- 9789356825680