Japani Sarai

Rajpal
SKU:
9789386534729
|
ISBN13:
9789386534729
$17.22
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जापानी सराय अनुकृति उपाध्याय का लेखन की दुनिया में पहला कदम है जिसमें सम्मिलित दस कहानियों को हिन्दी कहानी की किसी परम्परा में नहीं रखा जा सकता। ताज़ा हवा के झोंके की तरह ये कहानियाँ बारजे में फैली सर्दी की धूप की तरह हैं-सुकून भी देती हैं और कई बार चुभ भी जाती हैं। इन कहानियों में युवाओं के जीवन की चुनौतियाँ हैं, जो जीवन में अपने को स्थापित करने की जद्दोजहद में लगे हैं-कुछ पाना चाहते हैं और आज़ाद भी होना चाहते हैं। इन कहानियों में रिश्तों का बंधन नहीं साहचर्य का सुख है; कहीं भी ठहराव नहीं दिखाई देता है बल्कि यात्राएँ हैं। उन्हीं यात्राओं में बहुत कुछ मिलता जाता है, खोता जाता है। समय न हर्ष के लिए बचा है न विषाद के लिए। अनेक वर्षों तक हाँगकाँग में बैंकिंग और निवेश के सैक्टर में कार्यरत रहने के बाद अनुकृति उपाध्याय ने साहित्य-जगत में प्रवेश किया है। वह लिखती हैं इस आशा में कि इस रचनात्मक जोड़ने-तोड़ने में वह कुछ अनाम ढूँढा जा सके जो शायद है भी या नहीं भी। इनका संपर्क anukriti.upadhyay@gmail.com


  • | Author: Anukriti Upadhaya
  • | Publisher: Rajpal
  • | Publication Date: Jun 11, 2019
  • | Number of Pages: 130 pages
  • | Binding: Paperback or Softback
  • | ISBN-10: 938653472X
  • | ISBN-13: 9789386534729
Author:
Anukriti Upadhaya
Publisher:
Rajpal
Publication Date:
Jun 11, 2019
Number of pages:
130 pages
Binding:
Paperback or Softback
ISBN-10:
938653472X
ISBN-13:
9789386534729