Gul Ki Mehak

Anjuman Prakashan
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9789388556835
|
ISBN13:
9789388556835
$15.38
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"गुल की महक पुस्तक मेरे हाथों में हैं पुस्तक में 75 कवितायें हैं । इस पुस्तक का साहित्याकाष में कितना ऊँचा स्थान है यह समय तय करेगा । लेकिन पारिवारिक और सामाजिक अलगावों को खत्म कर फिर से जोड़ने का काम यह पुस्तक हर घर में कर सकेगी । जैसे- टूटते रिष्ते भाई के; कविता में जहाँ भाइयों के प्रेम और स्नेह का विषद वर्णन है वहीं 'नारी वेदना' में वर्तमान में नारी की दषा का वर्णन करते षब्द । अपनी कविताओं में श्री बमनयां जी ने अपनी कविताओं में आदिवासी जननायक महान क्रांतिकारी विरसा मुण्डा को भी स्थान दिया है। इस पुस्तक में कवि श्री बमनयां जी ने महाकवि सूरदास, महाकवि तुलसीदास, कबीर, रविदास, मीरा और मैथिलीषरण गुप्त आदि पर कवितायें लिखकर उन्हें सादर आदरांजलि भेंट की। महापुरूषों में महानायक भीमराव अंबेडकर, बाबू जगजीवनराम षहीद ऊधमसिंह, महाराजा खेतसिंह और महाराजा खलकसिंह जूदेव को अपने काव्य में स्थान देकर अपनी लेखनी को धन्य किया । अपने गृह नगर खनियांधाना पर कविता लेखन से कवि बमनयां जी का मातृभूमि से प्रेम प्रकट होता है। सुबह की सैर, ताले चाबी का संगम, माँ की ममता, बिका हुआ मतदाता और नौकरी की आकांक्षा वर्तमान परिवेष को उजागर करती कवितायें हैं ज&


  • | Author: Baijnath Prasad Bamanaya
  • | Publisher: Anjuman Prakashan
  • | Publication Date: May 11, 2023
  • | Number of Pages: 140 pages
  • | Binding: Paperback or Softback
  • | ISBN-10: 9388556836
  • | ISBN-13: 9789388556835
Author:
Baijnath Prasad Bamanaya
Publisher:
Anjuman Prakashan
Publication Date:
May 11, 2023
Number of pages:
140 pages
Binding:
Paperback or Softback
ISBN-10:
9388556836
ISBN-13:
9789388556835